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माँ योगिनी मंदिर, गोड्डा (झारखण्ड): आस्था, तंत्र साधना और रहस्य का अद्भुत संगम।

माँ योगिनी मंदिर, गोड्डा (झारखण्ड): आस्था, तंत्र साधना और रहस्य का अद्भुत संगम।

प्रिय पाठकों और श्रद्धालु मित्रों,
नमस्कार!

आज हम आपको झारखण्ड राज्य की गोड्डा जिला की उस पावन और रहस्यमयी धरती से रूबरू कराने जा रहे हैं, दोस्तों जहाँ आस्था, तंत्र साधना और इतिहास एक-दूसरे से जुड़कर एक अद्भुत और अनोखी कहानी कहती हैं। आज का यह लेख उन सभी दर्शकों और पाठकों के लिए है, जो भारत के सभी प्राचीन धार्मिक स्थलों, रहस्यमय मंदिरों और आध्यात्मिक ऊर्जा को जानने-समझने की रुचि रखते हैं। आइए, इस लेख के माध्यम से हमसब गोड्डा से लगभग 15 से 20 किलोमीटर बारकोप में स्थित मां योगिनी मंदिर, की अद्भुत मान्यताओं और रहस्यों को जानते हैं।

दोस्त झारखण्ड की धरती न केवल प्राकृतिक सौंदर्य और पहाड़ जंगलो के लिए जानी जाती है, बल्कि यहां पे स्थित प्राचीन धार्मिक और तांत्रिक स्थलों के कारण भी देश में इसकी एक विशेष पहचान बनी है। इन्हीं आस्था और रहस्यमय से भरे स्थलों में से एक है माँ योगिनी मंदिर, जो की झारखंड के गोड्डा जिले के पथरगामा प्रखंड अंतर्गत बारकोप गांव में स्थित है। जोकि यह मंदिर गोड्डा जिला से लगभग 15 से 20 किलोमीटर की दूरी पर है और यहाँ पे वर्षों से श्रद्धालुओं, तंत्र साधकों और हमारे प्राचीन इतिहास जानकारी में रुचि रखने वालों को अपनी ओर आकर्षित करता ही रहा है।

बारकोप में स्थित माँ योगिनी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व।

बारकोप में स्थित माँ योगिनी मंदिर को लेकर लोगो में ये मान्यता है कि इसका इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इसकी जड़ें द्वापर युग तक जाती हैं। और धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार , प्राचीन काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय यहां पर भी बिताया था। यही कारण है कि इस स्थान का वर्णन अर्थात उल्लेख महाभारत काल से जुड़ी कथाओं में भी मिलता है।

प्राचीन काल में लोग इस मंदिर ‘गुप्त योगिनी’ मंदिर के नाम से भी जाना जाता था। उस समय इस सिद्धस्थल को अत्यंत गोपनीय रखा जाता था और केवल विशेष लोगो और साधकों को ही इसकी जानकारी होती थी। लोगो के बिच ये भी मान्यता है कि यहां की साधना की पद्धति अत्यंत कठिन और प्रभावशाली होती थी, जिसके कारण यह स्थान तंत्र साधना के प्रमुख केंद्रों (सथानो) में भी गिना जाता था।

maa yogini mandir godda

शक्तिपीठ से जुड़ी मान्यताएं

माँ योगिनी मंदिर को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यता यह भी है कि यह स्थल शक्तिपीठ से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव उनका जलता हुआ शरीर लेकर तांडव करने लगे थे और सृष्टि संकट में था , तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए थे। इसी क्रम में माता सती की बाईं जांघ इस स्थान (बरकोप) पर गिरी थी। हालांकि, इस शक्तिपीठ को लंबे समय तक गुप्त रखा गया, जिससे यह आम जनमानस की नजरों से बहुत समय तक दूर रहा।

विद्वानों के कथनानुसार, जहां सामान्य पुराणों में 51 शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है, वहीं योगिनी पुराण में शक्तिपीठों की संख्या 52 बताई गई है। माना जाता है कि मां योगिनी मंदिर उसी 52वें सिद्धपीठ से संबंधित है, जो इसे और भी विशेष बनाता है।

तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र

लोगो का मानना हैं की माँ योगिनी मंदिर तंत्र साधना के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जानकारों का मानना है कि तांत्रिक साधना के दृष्टि से यह मंदिर कामाख्या देवी मंदिर जोकि असम राज्य में स्थित है उसके बराबर माना जाता है।

दोनों मंदिरों में की समानता :

इन दोनों मंदिरों में पूजा की पद्धति लगभग समान है तथा तीन द्वार हैं, जोकी समान हैं, और तो और देवी की पूजा पिण्ड रूप में होती है

यही सब कारण है कि दूर-दराज़ से तंत्र विद्या के साधक यहां साधना करने आते रहे हैं। आज के समय में भी मंदिर परिसर और गर्भगृह के आसपास कई साधु-संतों को ध्यान और साधना में लीन देखा जा सकता है।

नर बलि से जुड़ा रहस्य

लोगों में मां योगिनी मंदिर से जुड़ी एक चर्चित और रहस्यमयी मान्यता यह भी है कि प्राचीन काल में यहां पर नर बलि की प्रथा प्रचलित थी। माना जाता है कि विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों के दौरान यह बलि दी जाती थी।

हालांकि, अंग्रेजो की शासनकाल में इस प्रथा को पूरी तरह से बंद करवा दिया गया था। वर्तमान समय में मंदिर में केवल प्रतीकात्मक और वैदिक पूजा-अर्चना ही की जाती है, जो श्रद्धा और आस्था पर आधारित है।

बट वृक्ष और साधना की परंपरा

मंदिर परिसर मे मुख्य मंदिर के ठीक सामने एक बहुत बड़ा और विशाल प्राचीन बट वृक्ष स्थित है। स्थानीय लोगों की मान्यताओं के अनुसार, इस वृक्ष के नीचे बैठकर कई साधकों ने कई वर्षों तक कठिन साधना की और सिद्धि प्राप्त की।

कहा जाता है कि यह बट वृक्ष आज भी विशेष ऊर्जा का केंद्र है और इसके नीचे ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है। यही कारण है कि श्रद्धालु आज भी इस वृक्ष के पास दीप जलाकर और मौन साधना कर अपनी मनोकामनाएं माता के चरणों में अर्पित करते हैं।

गर्भगृह: रहस्य और आस्था का केंद्र

माँ योगिनी मंदिर का गर्भगृह इस पूरे परिसर का सबसे रहस्यमयी और आकर्षक हिस्सा है। मंदिर के ठीक बगल से लगभग 354 सीढ़ियां चढ़कर, एक ऊंची पहाड़ी पर माता का गर्भगृह स्थित है।

गर्भगृह तक पहुंचने के लिए एक संकरी और अंधेरी गुफा से होकर गुजरना पड़ता है। बाहर से देखने पर यह गुफा इतनी संकरी और भयावह लगती है कि कई लोग अंदर जाने का साहस नहीं कर पाते।

लेकिन सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि:

गुफा के अंदर प्रवेश करते ही रहस्यमयी प्रकाश दिखाई देता है

यहां पे बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है

आश्चर्य की बात यह है कि बात यह भी है की अंदर नुकीले पत्थर होने के बावजूद श्रद्धालु सुरक्षित बाहर निकल आते हैं

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि माँ योगिनी के आशीर्वाद से ही यह सब संभव हो पाता है। यहां तक कि भारी शरीर वाले व्यक्ति भी माता की कृपा से गुफा की सकरी रास्ते को पार कर लेते हैं।

गर्भगृह के भीतर साधना

आज के समय भी गर्भगृह के भीतर भी कई साधु-संत साधना करते हुए देखे जा सकते हैं। यह स्थान अत्यंत शांत, रहस्यमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। लोगों मे मान्यता है कि यहां की साधना जल्दी फलदायी होती है, इसलिए आध्यात्मिक और तंत्र मार्ग में विश्वास रखने वाले लोग इस स्थान को अत्यंत पवित्र मानते हैं।

मनोकामना मंदिर

माँ योगिनी मंदिर के ठीक बगल की दूसरी ओर पहाड़ी पर स्थित है मनोकामना मंदिर। स्थानीय लोगों में मान्यता है कि माँ योगिनी के दर्शन के बाद यदि श्रद्धालु मनोकामना मंदिर जाकर सच्चे मन से प्रार्थना करें, तो उनकी इच्छाएं अवश्य पूरी होती हैं।

इसी कारण जो भी भक्त मां योगिनी के दर्शन के लिए बारकोप आता है, वह कभी भी मनोकामना मंदिर जाना नहीं भूलता। यहां विशेष रूप से संतान सुख प्राप्ति , रोजगार और स्वास्थ्य से जुड़ी कामनाएं मांगी जाती हैं और माँ के आशीर्वाद से सच्चे मन से माँगी गई उन सभी भक्तो की मनोकामना पूरी भी होती हैं।

माँ योगिनी मंदिर जाने का रास्ता

दोस्तों आप भी माँ योगनी मदिर जाने की सोच रहे है तो आप इन रास्तों से आसानी से जा सकते हैं, अगर बाय एयर आना कहते है तो आपको निकतम हवाई अड्डा जोकी देवघर हवाई अड्डा 100 KM, कोलकाता से नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट 370 KM, और राँची से बिरसा मुंडा एयरपोर्ट 350 KM की दूरी पर है,  निकतम हवाई अड्डा से आपको  निजी वाहन से आपको मंदिर तक जानी होगी जोकी आपको आसानी से मिल जाती है,

उसके बाद अगर आप ट्रेन से यानि रेलगाड़ी से आना चाहते है तो आपको सबसे नजड़ी रेलवे स्टेशन गोड्डा तक आ सकते है और उसके बाद आप टोटों या निजी वाहन या बस से जा सकते है जोकी आसानी से मिल जाती हैं।

उसके बाद अगर आप सड़क मार्ग से जाना कहते है तो आपको जैसे की पता है की जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर है, आसानी से जा सकते हैं ।

निष्कर्ष

बारकोप मे स्थित माँ योगिनी मंदिर, गोड्डा (झारखण्ड) का केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, तंत्र साधना, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम है। घने जंगलों, पहाड़ियों और आध्यात्मिक वातावरण से घिरा यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

दोस्तों यदि आप भी झारखण्ड के किसी ऐसे स्थान की तलाश में हैं, जहां श्रद्धा के साथ-साथ रहस्य और आध्यात्मिक शांति का अनुभव हो, तो माँ योगिनी मंदिर की यात्रा आपके लिए निश्चित रूप से यादगार साबित होगी।

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